प्राप्त समाचारों के अनुसार चीन एकमात्र वह देश नहीं है जिससे अमेरिका ने अपील की है कि तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए वह अपने तेल भंडारों का प्रयोग आरंभ कर दे।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका भी अपने तेल भंडारों को मुक्त कर दे और उनसे लाभ उठाना आरंभ कर दे तब भी उसके हित अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए बहुत सीमित होंगे। इसी प्रकार इस बात की भी गैरेन्टी नहीं है कि तेल भंडारों के प्रयोग से तेल के अधिक उत्पादन में प्रभाव पड़ेगा।
ज्ञात रहे कि ओपेक + ने घोषणा की है कि तेल की अंतरराष्ट्रीय मंडी में अधिक तेल पेश करने के बारे में वे एहतियात से काम लेंगे और प्रतीत नहीं हो रहा है कि अमेरिका ने उनका जो आह्वान किया है उससे वे चिंतित होंगे।